बुधवार, 28 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🔆 श्रीराधे प्रभातम् 🔆🌞🌞
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

मनमोहन प्यारे .... सांवरे ... लाडले कान्हां अब तो जाग जाओ देखो प्रात: हुआ चाहता है। रजनी का गहरा अंधकार भी धीमे - धीमें छट रहा है। आकाश अरुण वर्ण हो गया है। भानु की प्यारी स्वर्णिम किरणें चहु और फैलना चाहती है। देवो, मुनियों के साथ आपके दर्शन की प्रतीक्षा जाने कितने ही जन कर रहे है। अरे ... अरे .. देखो तो .... अब तो आपके द्वार पर ये छोटे - छोटे प्यारे से ग्वालसखा भी इकट्ठा होने लग गए है। सभी की दृष्टी एक ही आपके द्वार पर ही टिकी है। सभी के मन में बस एक ही चाह है। कब मेरा लाडला कान्हां जागे और हमें अपना प्यारा मुखडा दिखाकर हमारा जीवन धन्य करे , प्यारे ..... जरा देखो तो खिरक में से आपकी प्यारी गईयां बार बार कान उठाकर इधर ही देख रही है। कि ना जाने कब कान्हां दिखाई दे जाएं , अरे अब तो ग्वालों के घरों से दधि मंथन कि मधुर ध्वनि भी सुनाई देने लगी है। गोपियों के कंगनों की बार - बार आपस में रगडने से मधुर झंकारे , वृक्षो पर पक्षियों की ये मधुर कलरव ध्वनियां आती - जाती गोपियों के नूपरों की ये मधुर ध्वनियां मन को मोह रहीं है। उठो तो सही प्यारे जरा आंखे खोलकर तो देखो घर - घर के खुले द्वार मानों आपके आने के लिए ही प्रतीक्षा में खुले है। हे प्यारे ....अपनी मनमोहनी सूरत से गवाल बाल, गोप-गोपियों  और अपने भक्तों के मन को मोहने वाले लाडले ..... प्यारे जरा आँखे खोल कर देखो तो सही सभी आपकी प्रतीक्षा कर रहे है।

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

जागो बंसीवारे ललना ,
जागो बंसीवारे ललना जागो मोरे प्यारे ..

रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवाड़े ,
गोपी दही मथत सुनियत है कंगना की झनकारे ..

उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाड़े द्वारे ,
ग्वालबाल सब करत कोलाहल जय जय शब्द उचारे ..

माखन रोटी हाथ में लीजे गौअन के रखवारे ,
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर शरण आय को तारे ..

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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🌹एक बार प्रेम से बोलिए ...
🌹प्यारी श्री " राधे राधे "🌹💐💐
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मंगलवार, 27 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

गुरु‌र्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर:
गुरु साक्षात् परब्रम्हा: तस्मै श्री गुरुवे नमः

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

गुरु बिन कौन सम्हारे ।
को भव सागर पार उतारे ॥

टूटी फूटी नाव हमारी
पहुँच न पाई तट पर ।
जैसे कोई प्यासा राही ।
भटक गया पनघट पर ।
पास खड़ा गुरु मुस्काता है ।
दोनों बाँह पसारे।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

मेरे राम मुझे शक्ति दो ।
मन में मेरे दृढ़ भक्ति दो ।
राम काम मैं करूँ निरंतर ।
राम नाम चित धारे।
को भव सागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

जीवन पथ की उलझन लख कर।
खड़े न हो जाना तुम थक कर।
तेरा साथी, राम निरंजन ।
हरदम साथ तुम्हारे।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

हमराही तुम विकल न होना ।
संकट में धीरज ना खोना ।
अंधियारे में बाँह पकड़ कर ।
सत्गुरु राह दिखाये।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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सोमवार, 26 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेव |
जिब्हे पिबस्व अमृतं एत देव
गोविन्द दामोदर माधवेती ||

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

तूने रात गँवायी सोय के, दिवस गँवाया खाय के।
हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय॥

सुमिरन लगन लगाय के मुख से कछु ना बोल रे।
बाहर का पट बंद कर ले अंतर का पट खोल रे।
माला फेरत जुग हुआ, गया ना मन का फेर रे।
गया ना मन का फेर रे।
हाथ का मनका छाँड़ि दे, मन का मनका फेर॥

दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय रे।
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय रे।
सुख में सुमिरन ना किया दुख में करता याद रे।
दुख में करता याद रे।
कहे कबीर उस दास की कौन सुने फ़रियाद॥

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा
बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात
करोमि यध्य्त सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि ||

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

किसकी शरण में जाऊं अशरण शरण तुम्हीं हो ..

गज ग्राह से छुड़ाया प्रह्लाद को बचाया .
द्रौपदी का पट बढ़ाया निर्बल के बल तुम्हीं हो ..

अति दीन था सुदामा आया तुम्हारे धामा .
धनपति उसे बनाया निर्धन के धन तुम्हीं हो ..

तारा सदन कसाई अजामिल की गति बनाई .
गणिका सुपुर पठाई पातक हरण तुम्हीं हो ..

मुझको तो हे बिहारी आशा है बस तुम्हारी .
काहे सुरति बिसारी मेरे तो एक तुम्हीं हो ..

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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शनिवार, 24 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

शांताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशम् । विश्‍वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम् ।

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ज्ञानगम्यम् । वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् ॥

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

प्रभु तेरो नाम .....

जो ध्याये फल पाए ,सुख दाए तेरो नाम..।


तू दानी, तू अंतरयामी,

तेरी कृपा हो जाए तो स्वामी,

हर बिगड़ी बन जाए...

जीवन धन मिल जाए, मिल जाए...

मिल जाए , सुख दाए तेरो नाम ।। प्रभु तेरो नाम ....।।

बस जाए मोरा सूना अगना,

खिल जाए मुरझाया कगना ,

जीवन में रस आये,

जीवन धन मिल जाए , मिल जाए...

मिल जाए , सुख दाए तेरो नाम ।। प्रभु तेरो नाम ........।।

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

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🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेव |
जिब्हे पिबस्व अमृतं एत देव
गोविन्द दामोदर माधवेती ||

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

जागो...
जग उज्यारा छाए, मन का अन्धेरा जाए,
किरणों की रानी गाए, जागो हे मेरे मन मोहन, प्यारे

जागे रे जागे रे सारी कालिया जागी
नगर नगर सब कालिया जागी,
जागे रे जागे रे, जागे रे जागे रे जग जग

जागो मोहन प्यारे, जागो...
नवयुग चूमे नैन तिहारे

भीगी भीगी अखिओं से मुस्काए, यह नयी भोर तोहे अंग लगाए
बाहे फैलाओ ओ दुःख हारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

जिसने मन का दीप जलाया, दुनिया को उसने ही उजला पाया
मत रहना अखिओं के सहारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

किरण परी गगरी छलकाए, ज्योत का प्यासा प्यास भुझाए
फूल बने मन के अंगारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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गुरुवार, 22 सितंबर 2016

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🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव,
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देव देव ।।

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो ॥
तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो ।।

तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे कोई न अपना सिवा तुम्हारे ।
तुम्ही हो नैय्या तुम्ही खेवैय्या तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो ॥

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो ।।

जो कल खिलेंगे वो फूल हम हैं तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं ।
दया की दृष्टि सदा ही रखना तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो ॥

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो ।।

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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बुधवार, 21 सितंबर 2016

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🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

बुद्धया विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ स्तोतुं समुधत-मतिर्विगत-त्रपोऽहम् । बालं विहाय जल-संस्थितमिन्दु-विम्ब- मन्यः क इच्छति
जनः सहसा ग्रहितुम् ।।

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

दुःख सुख दोनों तन के कपडे किस कारन पहनाए
किस कारन पहनाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए
वो चाहे तो प्यासा मारे, चाहे तो प्यास बुझाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

तेरे मन की खातिर पगले तन का बिछा बिछौना
जब तक चाबी भरी प्रभु ने तब तक चले खिलौना
ऐसा नाचे मॉस की पुतली, जैसा वो नाच नचाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

जल बिन मछली जी नहीं सकती, माँ बिन जिए ना बच्चा
इन्दर उसका पानी भरता जिसका सिदक है सच्चा
वो चाहे तो गागर में भी सागर को छलकाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

बेसमझो को समझ नहीं कब आये कैसी घड़िया
जेठ महीने में लग सकती है सावन की झड़िया
कौन समय आकाश और धरती अपना ब्याह रचाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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मंगलवार, 20 सितंबर 2016

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🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

त्वत्संस्तवेन भव-सन्तति-सन्निबद्धं पापं क्षणात्क्षयमुपैति शरीरभाजाम् | आक्रान्त-लोकमति-नीलमशेषमाशु सूर्याशु-भिन्नमिव
शार्वरमन्धकारम् ||

अर्थात् :

प्यारे .......
आपकी स्तुति से, प्राणियों के, अनेक जन्मों में बाँधे गये पाप कर्म क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं जैसे सम्पूर्ण लोक में व्याप्त
रात्री का अंधकार सूर्य की किरणों से क्षणभर में छिन्न भिन्न हो जाता है|

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

राम दो निज चरणों में स्थान
शरणागत अपना जन जान
राम दो ...

अधमाधम मैं पतित पुरातन ।
साधन हीन निराश दुखी मन।
अंधकार में भटक रहा हूँ ।
राह दिखाओ अंगुली थाम।
राम दो ...

सर्वशक्तिमय राम जपूँ मैं ।
दिव्य शान्ति आनन्द छकूँ मैं।
सिमरन करूं निरंतर प्रभु मैं ।
राम नाम मुद मंगल धाम।
राम दो ...

केवल राम नाम ही जानूं ।
और धर्म मत ना पहिचानूं ।
जो गुरु मंत्र दिया सतगुरु ने।
उसमें है सबका कल्याण।
राम दो ...

हनुमत जैसा अतुलित बल दो ।
पर-सेवा का भाव प्रबल दो ।
बुद्धि विवेक शक्ति सम्बल दो ।
पूरा करूं राम का काम।
राम दो निज चरणों में स्थान

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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सोमवार, 19 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् |
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् |

अर्थात् :
 यह मेरा है ,यह उसका है ; ऐसी सोच संकुचित चित्त वोले व्यक्तियों की होती है;इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है |

 🌹🔱⚜💧भजनामृत💧⚜🔱🌹

जब तू ही तू है सबमें बसा
फिर कौन भला और कौन बुरा।

हर चीज में जलवा तेरा ही मुझे
नजर आया इन आखो से ।
एक बार जो देखा पर्दा हटा ।। फिर......

किस चीज से अब मैं प्यार करुं
और ठोकर से ठुकराऊँ किसे ।
जब दिल से दुइ का भेद मिटा ।। फिर....

फिर सुख दुःख रोना हँसना क्या,
और जीवन मरन बिछौना क्या ।
जब सबमे है प्रभु तेरी रजा ।।
फिर कौन भला और कौन बुरा ।।

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
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 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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रविवार, 18 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

शांताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशम् । विश्‍वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम् ।

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ज्ञानगम्यम् । वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् ॥

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

मेरे रोम रोम में श्याम, मगन मैं नाचूँगी
मुझे दुनिया से क्या काम, मगन मैं नाचूंगी
नाचूंगी, मैं तो नाचूंगी, सलोने श्याम, रसीले श्याम

मैं गिरिधर की गिरिधर मेरे,
जनम जनम के हो गए फेरे ।
मेरा जुड़ गया इनसे नाम,
मगन मैं नाचूंगी ॥

मुझे नचावे उसकी मस्ती,
मुझको मिल गयी बिकुल सस्ती ।
ना कौड़ी लगा ना दाम,
मगन मैं नाचूंगी ॥

जब काहना की बाजे मुरलिया,
छम छम बाजे मोरी पायलिया ।
अब लोग करे बदनाम,
मगन मैं नाचूंगी ॥

ऐसी नज़र प्रेम की मारी,
सुध बुध बूल गयी मुझे सारी ।
और भूल गयी घर बार,
मगन मैं नाचूंगी ॥

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
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 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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शनिवार, 17 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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प्यारे .......
"आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो, अपने हृदय को भगवत् प्रेम से ओतप्रोत कर जीवन को प्रेममय बना दो, अपनी जीवन को सार्थक बनाओ एक नई शुबह आपका इंतजार कर रही है। उठो .... आगे बढो ..!

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

परदे में बैठे बैठे यूँ ना मुस्कुराइए,
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए ।

पर्दा तेरा हमे नहीं मंजूर सांवरे,
बैठा है छुप के दीवानो से क्यों दूर सांवरे ।
मैं भी तो आया दो कदम, ज़रा तुम भी बढ़ाइए,
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए ॥

हम चाहने वाले हैं तेरे, हमे है तुमसे मोहोबत,
कर दो करम ज़रा दिखा दो, अब सांवरी सूरत ।
प्यासी निगाहे दीद की, जरा नजरे मिलाइए,
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए ॥

तेरी इक झलक को प्यारे मेरा अब दिल बेकरार है,
दीदार की तमन्ना मुझे अब तेरा इंतजार यही ।
रह रह के हमे इस तरह, यूँ न सताइए,
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए ॥

तू ही जिंदगी है बंदगी, तू ही आरजू हमारी,
अरमान मेरे दिल का करो पूरा बांके बिहारी ।
‘भक्तों’ को अपने प्रेम का पागल बनाइये ,
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए ॥

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

🌞🌞🌞🔆 सुप्रभातम् 🔆🌞🌞🌞
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करपूर गौरम करूणावतारम
संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |

सदा वसंतम हृदयारविंदे
भवम भवानी सहितं नमामि ||

 🌹🔱💧भजनामृत💧🔱🌹

जय राम रमारमनं शमनं . भव ताप भयाकुल पाहि जनं ..
अवधेस सुरेस रमेस विभो . शरनागत मांगत पाहि प्रभो ..
दससीस विनासन बीस भुजा . कृत दूरि महा महि भूरि रुजा ..
रजनीचर बृंद पतंग रहे . सर पावक तेज प्रचंड दहे ..
महि मंडल मंडन चारुतरं . धृत सायक चाप निषंग बरं ..
मद मोह महा ममता रजनी . तम पुंज दिवाकर तेज अनी ..
मनजात किरात निपात किये . मृग लोग कुभोग सरेन हिये ..
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे . विषया बन पांवर भूलि परे ..
बहु रोग बियोगिन्हि लोग हये . भवदंघ्रि निरादर के फल ए ..
भव सिंधु अगाध परे नर ते . पद पंकज प्रेम न जे करते ..
अति दीन मलीन दुःखी नितहीं . जिन्ह कें पद पंकज प्रीत नहीं ..
अवलंब भवंत कथा जिन्ह कें . प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें ..
नहिं राग न लोभ न मान मदा . तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा ..
एहि ते तव सेवक होत मुदा . मुनि त्यागत जोग भरोस सदा ..
करि प्रेम निरंतर नेम लियें . पद पंकज सेवत शुद्ध हियें ..
सम मानि निरादर आदरही . सब संत सुखी बिचरंति मही ..
मुनि मानस पंकज भृंग भजे . रघुवीर महा रनधीर अजे ..
तव नाम जपामि नमामि हरी . भव रोग महागद मान अरी ..
गुन सील कृपा परमायतनं . प्रनमामि निरंतर श्रीरमनं ..
रघुनंद निकंदय द्वंद्व घनं . महिपाल बिलोकय दीन जनं ..
बार बार बर मागौं हरषि देहु श्रीरंग .
पद सरोज अनपायानी भगति सदा सतसंग ..

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

  🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹          
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🌹एक बार प्रेम से बोलिए ...
🌹प्यारी श्री " राधे राधे "🌹💐💐
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